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A salary is the Drug They give you to Forget your Dreams

"A salary is the drug they give you to forget your dreams" suggests that relying on a steady paycheck can distract you from pursuing your true passions and goals. It implies that job security can numb your drive for personal growth and entrepreneurial ambitions, stifling the pursuit of dreams.


दैवीय प्रेम
दैवीय प्रेम कोई आकर्षण नहीं होता बल्कि समर्पण की वो अवस्था है जहाँ “पाने” की कोई इच्छा शेष नहीं रहती जिसे मिलते ही जीवन अपने आप पूर्ण हो जाए जहाँ किसी शर्त, किसी अपेक्षा किसी अधिकार की भाषा ही शेष न बचे -- वही प्रेम दैवीय होता है -- दैवीय प्रेम मे हाथ थामना आवश्यक नही -- निकटता का प्रदर्शन भी आवश्यक नही बल्कि यहाँ तो अनुपस्थिति भी एक पूर्ण उपस्थिति बन जाती है!- ____ ये वो प्रेम है जहाँ आत्मा आत्मा को पहचान लेती है बिना परिचय, बिना स्पर्श,बिना ये पूछे कि “तुम मेरे क्या हो?” दै


प्रेम और इच्छा का अंतर
गाँव के बाहर एक पुराना बरगद था,जहाँ लोग अक्सर जीवन की उलझनों पर बात करने आते थे।वहीं एक दिन एक युवक बैठा था—मन में बेचैनी, आँखों में भ्रम। वृद्ध साधक ने उसे देखा और कहा,“तुम्हारी उलझन प्रेम की नहीं,इच्छा की है।” युवक चुप रहा। साधक बोले—“यदि कभी किसी स्त्री की देह चाहिए हो,तो साहस रखो और सच्चे रहो।बिना लाग-लपेट के,विनम्रता से अपनी बात कहो।यदि वह स्वीकार करे,तो उसे अनुग्रह समझो।और यदि अस्वीकार करे,तो उसकी इच्छा का सम्मान करवहीं से लौट जाओ—जहाँ से आए थे।” फिर उन्होंने ठहरकर कहा—


Love Of OverThinker
"ओवरथिंकर" जैसे लोग हर शब्द बोलने से पहले दर्ज़नों अर्थों में उसे तोड़ते-जोड़ते है-- हर ख़ामोशी को अपराध मानकर ख़ुद से पूछताछ करते है-- ओवरथिंकर प्रेम में इसलिए गहरे उतरते है क्युँकि उन्हें पता होता है- अनकहा क्या चोट पहुँचा सकता है- वे अपने भीतर ही हज़ारों संवाद कर लेते है ताकि सामने वाला एक भी असहज पल से न गुज़रे!- _____ वे प्राथमिकता देते है पर दिखावे में नही बल्कि अपने हिस्से की नींद अपनी शांति अपने प्रश्न सब चुपचाप स्थगित कर देते है-- ओवरथिंकर पहले ख़ुद को समझाते हैं-- “


एक विषैले व्यक्ति
न तो साथ चाहिए, न तुम्हें आज़ाद छोड़ेंगे": एक विषैले व्यक्ति" हम सभी ने जीवन में कभी न कभी ऐसे लोगों का सामना किया है जो न तो हमारे साथ एक सच्चा और स्वस्थ रिश्ता रखना चाहते हैं, और न ही हमें पूरी तरह आज़ाद छोड़ना चाहते हैं। ऐसे लोग अपने नियंत्रण, हस्तक्षेप और मानसिक चालबाज़ियों से न केवल रिश्तों को जटिल बनाते हैं, बल्कि दूसरे व्यक्ति की पहचान और आत्मसम्मान को भी धूमिल कर देते हैं। ये लोग अक्सर "Toxic", यानी विषैले व्यवहार के उदाहरण होते हैं, और उनके व्यवहार में गैसलाइटिंग, इम


बात करने से पहले – एक आत्मचिंतन की आवश्यकता"
हम अक्सर किसी बातचीत में जल्दी से प्रतिक्रिया दे बैठते हैं अपनी सोच, अपने अनुभव, या अपने दृष्टिकोण के आधार पर। परंतु हर मनुष्य एक संपूर्ण ब्रह्मांड है, जिसकी अपनी जटिलता, अपनी पीड़ा, आशाएँ, विश्वास, डर और संवेदनाएँ होती हैं। इसलिए, कुछ कहने या जवाब देने से पहले स्वयं में एक बार ठहरकर आत्मचिंतन करना ज़रूरी होता है। शब्द केवल ध्वनियाँ नहीं होते; वे असर डालते हैं कभी सान्त्वना बनते हैं, कभी चोट। हर व्यक्ति की अपनी 'दुनिया' होती है हम यह मानकर चलते हैं कि सामने वाला हमें उसी तरह


धीरे-धीरे सूखती औरत
धीरे-धीरे सूखती है एक औरत, जैसे रात में किसी बगीचे का फूल जिसे किसी ने तोड़ा नहीं, मगर नमी चुरा ली हो हवा ने। वो सूखती है जब सुबह की चाय बनाते वक़्त कोई "थैंक यू" नहीं कहता, जब थाली में परोसी रोटियों के स्वाद पर चेहरे सिकुड़ते हैं, मगर उसकी मेहनत कोई नहीं देखता। वो सूखती है जब अपनी बात को बीच में रोक देना उसकी आदत बन जाती है, क्योंकि कोई सुनता नहीं, या सुनकर भी समझता नहीं। वो सूखती है जब उसकी पसंदें "गृहस्थी के तवे" में जल कर राख हो जाती हैं। नीली साड़ी जो उसे बहुत पसंद थी, व
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