top of page

बेरोज़गारी और गरीबी के रंग इतने पक्के हैं कि,इस रंग पर किसी और त्यौहार के रंग ही नहीं चढ़ते..!!

  • Writer: ELA
    ELA
  • Feb 7, 2025
  • 1 min read

होली आती है हर साल — रंग, खुशियाँ और जश्न लेकर...लेकिन कुछ चेहरे अब भी सूने हैं, कुछ आंखों में अब भी खालीपन है।

त्यौहार तो सबके लिए होते हैं,मगर पेट की आग, जेब की खालीपन और नौकरी की तलाशइन रंगों को फीका कर देती है।

जब तक हर हाथ को काम नहीं,जब तक हर घर में चूल्हा नहीं जलता —तब तक कोई भी रंग, सच्चे मायनों में त्योहार नहीं बन सकता।

सोचिए... समझिए... और जो बन सके, कीजिए।क्योंकि असली होली तब होगी, जब हर चेहरा मुस्कराएगा। 🌸

#बेरोज़गारी #गरीबी #FestivalWithMeaning #RealColorsOfLife


"बेरोज़गारी और गरीबी के रंग इतने पक्के हैं कि,इस रंग पर किसी और त्यौहार के रंग ही नहीं चढ़ते..!!"


बेरोज़गारी और गरीबी के रंग इतने पक्के हैं कि,

इस रंग पर किसी और त्यौहार के रंग ही नहीं चढ़ते..!!






The colours of unemployment and poverty are so strong that the colours of any other festival cannot match these colours..!!

Comments

Rated 0 out of 5 stars.
No ratings yet

Add a rating
bottom of page