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- आहिस्ता पर कोई शायरी...
सब जगह पर है चाँद भी वही सितारे वही और है वही अंबर न होगा आहिस्ता-आहिस्ता ख़त्म होता साल और न होगा यही दिसंबर #अनिता_सैनी लोगों ने दिए है ज़ख्म फूलों से डर लकता है अब गुलिस्तां से हार कर तन्हा बैठते है जब दुनिया से पकड़ लेता है कोई हाथ आहिस्ता से। आहिस्ता आहिस्ता मोहब्बत हुई थी, अब वो आहिस्ता आहिस्ता दिल तोड़ रहे हैं- खबर मिली है उनके जान-कारण से, वो आहिस्ता आहिस्ता हमें सूद रहे हैं..!! शब-ए-फ़ुर्क़त का जागा हूँ फ़रिश्तो अब तो सोने दो कभी फ़ुर्सत में कर लेना हिसाब आहिस्ता आहिस्ता #अमीर_मीनाई कदम रखता है जब रास्तों पे यार आहिस्ता आहिस्ता.. तो छट जाता है सब गर्द-ओ-गुबार आहिस्ता आहिस्ता.. भरी आँखों से होकर दिल में जाना सैन थोड़े ही है.. चढ़े दरियाओं को करते हैं पार आहिस्ता आहिस्ता.. नज़र आता है तो यूँ देखता जाता हूँ मै उसको.. की चल पड़ता है कारोबार आहिस्ता आहिस्ता..!! न चलो ले कर के मेरा जनाज़ा आहिस्ता आहिस्ता.. बड़ी मुद्दत से रही थी आरजू दीदार-ए-मुस्तफा की..!! रोज तारों को नुमाइश में खलल पड़ता है.. चांद पागल है अंधेरे में निकल पड़ता है। उसकी याद आई है.. सांसों जरा आहिस्ता चलो धड़कनों से भी इबादत में खलल पड़ता है। #राहत_इंदौरी जवाँ होने लगे जब वो तो हम से कर लिया पर्दा हया यक-लख़्त आई और शबाब आहिस्ता आहिस्ता शब-ए-फ़ुर्क़त का जागा हूँ फ़रिश्तो अब तो सोने दो कभी फ़ुर्सत में कर लेना हिसाब आहिस्ता आहिस्ता #अमीर_मीनाई कुछ बताना हमने - कुछ तुमने पूछना छोड़ दिया आहिस्ता आहिस्ता मीठी बातों का शोर - मायूस हो सो गया मैं ही क्यों और तुम क्यों नहीं के झगड़े में हम कुछ सहम गया साथ चले थे तुम और मैं ये याद भर रह गया झूठी तसल्लियाँ अच्छी होती हैं इनसे इंसान टूट कर बिखरता नहीं इनसे इंसान विघटित होता है!! तिल तिल , क़तरा क़तरा, आहिस्ता आहिस्ता !! यूँ भी रोज़ाना का मरना ही हम जैसों की नियति है... और आहिस्ता किजिए बातें धड़कने कोई सुन रहा होगा कान रखते हैं ये दर-ओ-देवर लफ़्ज़ों की सारी बातें सुनेंगे में अब आहिस्ता-आहिस्ता समझ रहा हूँ, कि लोग अचानक पंखे से क्यों लटक जाते है... आहिस्ता चल एक जिंदगी, कुछ कर्ज चुकाने बाकी है, कुछ के दर्द मिटाने बाकी है, कुछ फर्ज निभाने बाकी है..!! 👣 बदल गए कुछ लोग #आहिस्ता #आहिस्ता। अब तो अपना भी हक बनता है।। नजर से फूल चुनती है नजर आहिस्ता आहिस्ता आहिस्ता आहिस्ता मोहब्बत रंग लाती है मगर आहिस्ता आहिस्ता आहिस्ता आहिस्ता उस की याद आई है साँसो ज़रा आहिस्ता चलो धड़कनों से भी इबादत में ख़लल पड़ता है आहिस्ता आहिस्ता समझ जाओगे ख़ामोश लोगों से दुश्मनी, बहुत शोर करती है..!! #प्रकाश_सिंह आजकल खुद से ही रूठने लगा हूं आहिस्ता आहिस्ता टूटने लगा हूं..!! #कीर्ति_चन्द्रा काम बुरा कुछ नइं होता है करते जाना बस! दुश्वारी जो टाँग अड़ाए लड़ते जाना बस! एक ज़मात यहाँ ऐसी भी है जिनकी आदत, आहिस्ता-आहिस्ता पंख कुतरते जाना बस! आहिस्ता चल ये जिंदगी बहुत काम बाकी है। आहिस्ता आहिस्ता हम भी तुम्हारी नज़रों में गिरने वाले हैं मैं देख रहा हूं तेरी महफ़िल में आने वाले लोग पैसे वाले हैं..!! #हसनतंवर जाने कब तक तिरी तस्वीर निगाहों में रही हो गई रात तिरे अक्स को तकते तकते मैं ने फिर तेरे तसव्वुर के किसी लम्हे में तेरी तस्वीर पे लब रख दिए आहिस्ता से..!! #परवीन_शाकिर आहिस्ता से ख्वाबों में आता है कोई, शरारत से अपनी रातों जगाता है कोई, लूटकर चैन ओ सुकून दिलासा देता है, न जाने ये कैसा रिश्ता निभाता है कोई..!! आहिस्ता तमाचा मार ऐ ज़िंदगी.. अब चेहरे पर निशान दिखने लगे हैं..!! मुझे मंज़ूर गर तर्क-ए-ताल्लुक है रज़ा तेरी मगर तूटेगा रिश्ता दर्द का आहिस्ता आहिस्ता..!! वो बेदर्दी से सर काटें 'अमीर' और मैं कहूँ उन से हुज़ूर आहिस्ता आहिस्ता जनाब आहिस्ता आहिस्ता..!! #अमीर_मीनाई तन्हा कर देती है हर रोज़ ये तेरी यादें.. ऐसा लगता है जैसे भुल रहे हो तुम आहिस्ता_आहिस्ता..!! सरकती जाये है रुख से नक़ाब आहिस्ता आहिस्ता, निकलता आ रहा है आफ़ताब आहिस्ता आहिस्ता! सवाल-ए-वसल पे उनको उदू का खौफ़ है इतना, दबे होंठों से देते हैं जवाब आहिस्ता आहिस्ता..!! #Amir_Minai चले तो कट ही जाएगा सफ़र आहिस्ता आहिस्ता हम उसके पास जाते हैं मगर आहिस्ता आहिस्ता यूं ही इक रोज़ अपने दिल का क़िस्सा भी सुना देना ख़िताब आहिस्ता आहिस्ता नज़र आहिस्ता आहिस्ता..!! #मुस्तफा_जैदी इश्क़ है ज़रा आहिस्ता से, कह देना उसे सांस तो ले। #मीत आहिस्ता चल ऐ ज़िन्दगी कुछ कर्ज चुकाने बाक़ी हैं , कुछ दर्द मिटाने बाक़ी हैं कुछ फर्ज निभाने बाक़ी हैं..!! कुछ इतना साथ रहती हैं मुझे डर है कमी तेरी......!! ना बन जाए तेरा नेम-उल-बदल आहिस्ता आहिस्ता......!!!! #उमैर_नजमी थक जायेगे इस सफर में आहिस्ता आहिस्ता एक तरफा तुम्हे चाहना अब होता नही हमसे..!! आहिस्ता आहिस्ता चल ए जिन्दगी कुछ कर्ज उतारने बाकी है अभी कुछ फर्ज निभाना बाकी है..!! कौन उठाएगा हमारी आंखों से गिरे हुए लोगों को यहां आहिस्ता आहिस्ता सब लोगों को परख लिया है हमने यहां..!! घटेगा तेरे कूचे में वक़ार आहिस्ता आहिस्ता बढ़ेगा आशिक़ी का ए'तिबार आहिस्ता आहिस्ता बहुत नादिम हुए आख़िर वो मेरे क़त्ल-ए-नाहक़ पर हुई क़द्र-ए-वफ़ा जब आश्कार आहिस्ता आहिस्ता #हसरत_मोहानी *ए जिन्दगी तु चल आहिस्ता आहिस्ता* **उनकी यादों से हैं मेरा गहरा रिश्ता** #दिनेश_दिवाना इक आख़री थहराओ लेने की ख़ातिर घूम रहे है जहां में आहिस्ता-आहिस्ता किसी की जीत की ख़ातिर मैं सब कुछ हार जाना चाहता हूँ आहिस्ता-आहिस्ता यहीं इंतज़ार करूँगा तुम्हारी ख़ातिर मैं तुम ज़माना देख लो आहिस्ता-आहिस्ता रात से कह दो की आहिस्ता गुजरे...!! कोई आया है... ख्वाबों में एक मुद्दत के बाद...!! एक बार मुस्कुराओ आहिस्ता ही सही। हाल-ए-दिल बताओ आहिस्ता ही सही।। ख़ुशियाँ तो बिखेरो सूनी सी ज़िंदगी में, मेरी ज़िंदगी में आओ आहिस्ता ही सही..!! सरकती जाए है रुख़ से नक़ाब आहिस्ता आहिस्ता निकलता आ रहा है आफ़्ताब आहिस्ता आहिस्ता..!! आओ किसी शाम बैठ कर कुछ विचार करें, आहिस्ता-आहिस्ता ही सही पर प्यार की शुरुआत तो करें..!! ये बादले ये हवाएं अपना रुख बदल रहे हैं हम अब आहिस्ता-आहिस्ता संभल रहे हैं..!! #पिनाक_मोढ़ा आहिस्ता-आहिस्ता मेरा दिल टूट गया...!!💔🖤 वो बेदर्दी से सर काटें 'अमीर' और मैं कहूँ उन से हुज़ूर आहिस्ता आहिस्ता जनाब आहिस्ता आहिस्ता..!! इनायत रब की आयी लब पे गज़ल आहिस्ता आहिस्ता ढलेगी शाम डूबे दिन डूबे मंज़र मगर आहिस्ता आहिस्ता खिला गुलशन मने मुफलिस मगर आहिस्ता आहिस्ता..!! सरकती जाए है रुख़ से नक़ाब आहिस्ता- आहिस्ता । निकलता आ रहा है आफ़ताब आहिस्ता - आहिस्ता ।। शब-ए-फ़ुर्क़त का जागा हूं फ़रिश्तों अब तो सोने दो । कभी फ़ुर्सत में कर लेना हिसाब आहिस्ता - आहिस्ता ।। मेरा तारों को ताकते हुए बरसों गुज़ारना बाकी है, और आधे से चांद में तेरी हसीं ढूंढ लेना काफ़ी है।। रो पड़ी मोहब्बत, जब उसके दरवाजे से निकली रूह उठ कर बोली, ले चलना जनाजा मेरा अहिस्ता अहिस्ता पैरो में उनके अब भी छाले हैं..!! और आहिस्ता कीजिए बातें धड़कने कोई सुन रहा होगा #पंकज_उदास, ज़फ़र गोरखपुरी सरकती जाये है रुख से नक़ाब आहिस्ता आहिस्ता निकलता आ रहा है आफ़ताब आहिस्ता आहिस्ता जवां होने लगे जब वो तो हमसे कर लिया परदा हया यकलख़्त आई और शबाब आहिस्ता आहिस्ता..!! आहिस्ता चल ज़िन्दगी, अभी कई क़र्ज़ चुकाना बाकी है, कुछ दर्द मिटाना बाकी है, कुछ फ़र्ज़ निभाना बाकी है। #गुलज़ार सरकती जाए है रुख़ से नक़ाब आहिस्ता आहिस्ता निकलता आ रहा आफताब आहिस्ता आहिस्ता #अमीर_मिनाई उसने आहिस्ता से जब पुकारा मुझे, झुक के तकने लगा हर सितारा मुझे..!! सवाल-ए-वसल पे उनको उदू का खौफ़ है इतना दबे होंठों से देते हैं जवाब आहिस्ता आहिस्ता..!! आहिस्ता आहिस्ता उम्र घट रही है आहिस्ता आहिस्ता मौत करीब आ रही है..!! आहिस्ता से वो मेरे कानों में कह गई इंतजार करना आज मौत की सैया पे लेटा उम्मीद में हूं..!! आहिस्ता चल ऐ ज़िंदगी कुछ क़र्ज़ चुकाने बाकी हैं, कुछ दर्द मिटाने बाकी हैं कुछ फ़र्ज़ निभाने बाकी हैं..!! मोहब्बत दिल पे करती है असर आहिस्ता आहिस्ता मरीज़-ए-ग़म को होती है ख़बर आहिस्ता आहिस्ता बचाऊँ किस तरह कच्चे मकाँ को तेज़ बारिश में गिरे जाते हैं सब दीवार-ओ-दर आहिस्ता आहिस्ता (#मुज़फ्फ़र_अहमद) इधर से क़ैस ही क्या एक पूरी क़ौम गुज़री है ये बैठेगा ग़ुबार-ए-रह-गुज़र आहिस्ता आहिस्ता..!! #फिराक_गोरखपुरी नज़र से फूल चुनती है नज़र आहिस्ता आहिस्ता मोहब्बत रंग लाती है मगर आहिस्ता आहिस्ता..!! #निदा_फाजली वो जो रफ्तार के कायल रहे हैं ताउम्र जब से रहबरी मिली आहिस्ता के पैरोकार बने हैं..!! सीने में ज़ख्मों को छुपाकर मुस्कुराता हूँ, अब आ रहा ये भी हुनर मुझे आहिस्ता आहिस्ता..!! आहिस्ता आहिस्ता वो हमसे दूर जा रही है। बेचैन दिल मेरा बार बार ये कह रहा है..!! खलल पैदा न हो उस दिलरुबा की नींद में कोई गुजर जाना उधर से ए सबा आहिस्ता आहिस्ता..!! ये शबनमी लहजा है आहिस्ता ग़ज़ल पढ़ना तितली की कहानी है फूलों की ज़बानी है..!! मैं अब आहिस्ता आहिस्ता समझ रहा हु कि लोग अचानक यू फंखे पे क्यूं लटक जाते है..!! आहिस्ता आहिस्ता चल कर भर्तियाँ आ रही थी तभी ख़बर आई कोरोना की चौथी लहर चलने लगी, अभ्यर्थी सामाजिक दूरी बनाए रहे..!! जख्म ही खोलने आई है तो उजलत कैसी , छू मेरे जिस्म को ऐ बाद-ए-सबा आहिस्ता..!! आहिस्ता आहिस्ता ही सही वो दिल में उतरती तो है.. हमसे अच्छी तो सड़क है जिसपे होके वो गुजरती हो है..!! #आशीष_माधव जिंदगी गुजर जायेगी आहिस्ता आहिस्ता फिर वक्त़ डगमगायेगा आहिस्ता आहिस्ता तुम याद हमें रखोगे कुछ देर फिर यह याद भी मिट जायेगी आहिस्ता आहिस्ता।। द्वार –ए – दिल पर मिरे दस्तक हुई हैं मिले जो नैन उनसे आहिस्ता प्यार में पींगें बढ़ाइए आहिस्ता आहिस्ता जीतिए दिलबर का ऐतबार आहिस्ता आहिस्ता #आरिफ़ छू कर एहसासों को मेरे कहीं ओझल हो गये, आहिस्ता से । हुआ है कत्ल किसी के अरमानों का यह खबर फैली भी फैली है, आहिस्ता से । #अमित 'तन्हा' बेकाबू हो जाती है उस वक्त धड़कन मेरी, जब तुम आहिस्ता आहिस्ता मेरे करीब आती हो।। प्रेम कितना क्षणिक है, और भूलना भूलना आहिस्ता आहिस्ता... आहिस्ता बात कर कि हवा तेज़ है बहुत ऐसा न हो कि सारा नगर बोलने लगे #वज़ीर_आगा बड़ी नाज़ुक है ये मंज़िल मोहब्बत का सफ़र है, धड़क #आहिस्ता से ऐ दिल, मोहब्बत का सफ़र है! #ज़मीर_काज़मी आहिस्ता आहिस्ता दिल ढूंढ ही लेता है किसी के दिल तक जाने का रास्ता आहिस्ता, आहिस्ता से इश्क़ में उसके मैं ऐसे खोया झूठी मुहब्बत में मैं हिज़्र के लिहाफ़ में लिपट गया #राखी_लुक्कड़ आहिस्ता आहिस्ता ज़िंदगी से नफ़रत हो रही है, लगता है दुबारा इस दिल को मुहब्बत हो रही है।। आहिस्ता आहिस्ता दूर जा रही है इसलिए शायद साँस कम आ रही है #हर्षित_शुक्ला आहिस्ता आहिस्ता हम तुम्हारे हुए.. यू ना नज़रे मिलाया करो...😃💕 गहरा असर करता है ये रोग इश्क़ का जान तो लेता है मगर आहिस्ता आहिस्ता। #सौरभ उस की याद आई है साँसो ज़रा आहिस्ता चलो धड़कनों से भी इबादत में ख़लल पड़ता है #राहत_इंदौरी उस ने आहिस्ता से दीवार को थामा होगा सोच कर ये कि बहल जाए परेशानी-ए-दिल #परवीन_शाकिर सरकती जाए है रुख़ से नक़ाब आहिस्ता आहिस्ता निकलता आ रहा है आफ़्ताब आहिस्ता आहिस्ता #अमीर_मीनाई आहिस्ता गुजर ऐ जिंदगी मेरे यार को समझ देर से आता है... -आर्यन
- ❝सलवार सूट पर मुझे उसकी छोटी सी बिंदी पसंद है..हां मुझे अंग्रेजी से ज्यादा हिंदी पसंद है..!!❞
❝सलवार सूट पर मुझे उसकी छोटी सी बिंदी पसंद है.. हां मुझे अंग्रेजी से ज्यादा हिंदी पसंद है..!! ❞
- ❝लाइफ में एक पार्टनर होना जरूरी है.. वरना दिल की बात स्टेटस पर लिखनी पड़ती है..!❞
❝लाइफ में एक पार्टनर होना जरूरी है.. वरना दिल की बात स्टेटस पर लिखनी पड़ती है..!❞
- ❝चुपचाप चल रहे थे जिंदगी के सफर में..तुम पर नजर पड़ी और गुमराह हो गए..!!❞
❝चुपचाप चल रहे थे जिंदगी के सफर में.. तुम पर नजर पड़ी और गुमराह हो गए..❞
- 100 days to January 1st 2023. 100% focus on these and you'll be unrecognizable next year... 1 जनवरी
1. एक दिनचर्या विकसित करें। रात 9:00 बजे सोएं और सुबह 4:00 बजे जाग जाएं। 2. लोगों को बताएं कि आप कैसा महसूस करते हैं। आपको अपने आसपास के सभी लोगों से सम्मान मिलेगा। 3. प्रकृति से दोस्ती करें, अपने रक्त प्रवाह को बेहतर बनाने और कैलोरी बर्न करने के लिए प्रतिदिन 10,000 कदम चलें। 4. आप जो पीते हैं उसका 97% पानी होना चाहिए। प्रति दिन 3 लीटर पर्याप्त है। 5. अपने दिन के 100 मिनट अकेले पढ़ने और लिखने में बिताएं। महान मन मौन में निर्मित होते हैं। 6. एक कौशल सीखने के लिए प्रतिबद्ध रहें जो आपको आय के अतिरिक्त स्रोत जोड़ने में मदद करेगा। 7. अपना आहार ठीक करें। इसे जटिल न करें, 3 अंडे खाएं, अधिक स्टेक और फल 8. स्क्रीन का समय घटाकर 4 घंटे प्रतिदिन करें। आपको स्क्रीन के बाहर शांति मिलेगी। 9. सस्ते डोपामाइन का पीछा करना बंद करें। आनंद से अधिक महत्वपूर्ण क्या है को प्राथमिकता दें। 10. अपनी त्वचा के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए रोजाना 20 मिनट सीधी धूप लें। 11. आपके आहार का 75% प्रोटीन होना चाहिए। वजन बढ़ाने और मांसपेशियों के निर्माण के लिए पर्याप्त खाएं। 12. दिन में 4 घंटे केंद्रित कार्य करते हुए निर्धारित करें। काम करते समय सूचनाएं या किसी भी तरह का ध्यान भंग करना बंद कर दें। 13. सोने के तुरंत बाद 100 पुशअप्स करें। अपनी छाती, हाथ और बेहतर मुद्रा का निर्माण करें। 14. 10 मिनट का ब्रेक लें और गहरे काम के दौरान अपने फोकस को 5 गुना बेहतर बनाने के लिए इधर-उधर घूमें। 15. व्यवसाय खोलें, पाठ्यक्रमों में निवेश करें और आप नींद में भी अधिक पैसा कमाएँगे।
- त्याग और तपस्या से ही प्रेम का अर्थ है, बिना प्रेम और समर्पण के सबकुछ व्यर्थ है ..!!
त्याग और तपस्या से ही प्रेम का अर्थ है, बिना प्रेम और समर्पण के सबकुछ व्यर्थ है ..!!
- यादों ने तुम्हारी जड़ कर दिया है, दुनिया दारी से जैसे बेखबर कर दिया है ..!!
यादों ने तुम्हारी जड़ कर दिया है, दुनिया दारी से जैसे बेखबर कर दिया है ..!!
- ख्वाहिश भी तुम हो, ख्वाब भी तुम हो, ख़्यालो मेरे रहने वाले, मेरे लबों की मुस्कान भी तुम हो ..!!
ख्वाहिश भी तुम हो, ख्वाब भी तुम हो, ख़्यालो मेरे रहने वाले, मेरे लबों की मुस्कान भी तुम हो ..!!
- वो हमें नज़र अंदाज़ करे तो गिला नहीं, शिकवा तो तब है जब, नज़र अंदाज़ करके भी हमसे प्यार का दावा करते
वो हमें नज़र अंदाज़ करे तो गिला नहीं, शिकवा तो तब है जब, नज़र अंदाज़ करके भी हमसे प्यार का दावा करते हैं ..!!











