top of page

For Boys

Public·1 member

जब एक औरत हार मान लेती है, तो समझ लो—सब कुछ खत्म हो चुका होता है।

एक औरत बिना वजह कभी नहीं जाती।

जब वो छोड़कर जाती है, तो इसलिए क्योंकि वो पहले ही:

• चुपचाप बहुत कुछ सह चुकी होती है

• रातों को रो-रो कर सो चुकी होती है

• बदलाव की भीख माँग चुकी होती है—जो कभी आया ही नहीं

वो आसानी से हार नहीं मानती।

वो दर्द में भी साथ निभाती है,

उम्मीद करती है, माफ करती है, लड़ती है—

जब तक उसके अंदर कुछ भी बचा न हो।

जब एक औरत हार मान लेती है,

तो इसका मतलब ये नहीं कि उसने प्यार करना छोड़ दिया है—

बल्कि इसका मतलब है कि उसने खुद को मिटाना छोड़ दिया है,

सिर्फ इस उम्मीद में कि उसे प्यार मिलेगा।

उसकी खामोशी अचानक नहीं आती—

वो हर उस जंग की गूंज होती है जो उसने अकेले लड़ी होती है।

तो अगर वो अब भी तुम्हारे पास है:

💖 सुनो—इससे पहले कि उसकी आवाज़ खामोशी बन जाए।

💖 थाम लो—इससे पहले कि उसका दिल ठंडा पड़ जाए।

💖 कदर करो—इससे पहले कि वो बस एक याद बन जाए।

क्योंकि जब एक औरत हार मान लेती है,

तो फिर कोई दूसरा मौका नहीं होता—

कोई वापसी नहीं होती।



जब एक औरत हार मान लेती है, तो समझ लो—सब कुछ खत्म हो चुका होता है।

1 View
ELA
ELA
Apr 22, 2025

सही बात है औरत कभी हार नहीं मानती । वो अपने पति के भरोसे का फायदा उठाती है उसकी पीठ में छुरा भौंकती है , पति को पैसे और स्वास्थ्य से बर्बाद करती है , पति को आर्थिक रूप से लाचार करती है , गैर मर्दों से सम्बन्ध बनाती है और उन मर्दों के जरिये पति को जान से मरवाने की साजिश करती है , पति की नोकरी पर प्रहार करती है , बच्चों को पति के खिलाफ भड़काकर उन्हें अपने पिता से दूर कर देती है , नाजायज मांग और अवैध करतूतों को छिपाने के लिए पति पर झूठे आरोप लगाती है उसपर झूठे केस करती है ।

जो कानून महिलाओं की सुरक्षा के लिए बने है उनका दुरुपयोग कर पति को आत्महत्या करने के लिए मजबूर करती है , पुलिस और वकीलों के साथ मिलकर पति की संपत्ति ओर पैसे हड़पने के लिए सभी पैतरे आजमाती है ।

औरत क़भी हार नहीं मानती ... निर्लज्जता , बेशर्मी ओर चरित्रहीनता की सभी सीमाएं पार कर जाती है , मगर हार नहीं मानती ,,, अपने परिवार , अपने पति अपने बच्चों को बर्बाद करके अंततः जीत ही जाती है ।

About

Welcome! Have a look around and join the conversations.

bottom of page