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35 की उम्र तक जान लेने योग्य 10 कड़वी लेकिन ज़रूरी सच्चाइयाँ (पुरुषों के लिए)

"35 की उम्र तक आपको वैधता, ध्यान या ड्रामा की तलाश में नहीं भटकना चाहिए। आपको शांति, शक्ति और उद्देश्य को गढ़ने में लगा होना चाहिए।"

जीवन के पहले तीस साल अधिकतर लोग सीखने, गलती करने, और खुद को समझने में गुज़ारते हैं। लेकिन 30 के बाद की उम्र परिपक्वता, स्थिरता और उद्देश्य के निर्माण की होती है। यहाँ 10 ऐसी बातें हैं जो हर पुरुष को 35 की उम्र से पहले समझ लेनी चाहिए ताकि वो एक सशक्त, संतुलित और उद्देश्यपूर्ण जीवन जी सके।

1. हर औरत आपकी ज़िंदगी में आने के काबिल नहीं होती।

हर रिश्ते का आधार आकर्षण नहीं, बल्कि मूल्य, सम्मान और समझदारी होनी चाहिए। वक़्त और ऊर्जा सीमित हैं उन्हें वहाँ निवेश करें जहाँ आपको भावनात्मक स्थिरता और साथ मिले, न कि भ्रम और खोखली अपेक्षाएँ।

2. आत्म-सम्मान, दिखावे से कहीं ज़्यादा कीमती होता है।

दुनिया को प्रभावित करने की चाह में खुद को खो…

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बदलते समाज में कुंवारे युवक और उड़ान भरती लड़कियाँ"

भारतीय समाज, विशेषकर ग्रामीण भारत, एक बुनियादी परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। जहाँ एक ओर युवा लड़कियाँ समाज की पारंपरिक सीमाओं को तोड़कर शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं, वहीं दूसरी ओर गाँवों में एक ऐसी पीढ़ी खड़ी हो रही है बेरोजगार कुंवारे युवाओं की फौज, जो न तो सामाजिक बदलाव की रफ्तार पकड़ पा रही है और न ही अपने पारंपरिक पुरुष वर्चस्व को सहजता से छोड़ पा रही है। यह असंतुलन केवल आर्थिक या शैक्षिक नहीं, बल्कि एक गहरे मनोवैज्ञानिक और सामाजिक तनाव का संकेत भी है।

1. पुरुष युवाओं की स्थिति: कुंवारेपन की पीड़ा या पहचान का संकट?

गाँवों में युवाओं की एक बड़ी संख्या बेरोजगार है। ये वही युवक हैं जो कभी पारिवारिक मुखिया बनने, ज़िम्मेदारियाँ संभालने और शादी करके “घर बसाने” का सपना देखते थे। लेकिन अब उनके सपनों की जमीन खिसक रही है।

विवाह की पारंपरिक व्यवस्था में…

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दूरी की मर्यादा वाले रिश्ते

एक बड़े शहर में अनन्या और विवेक नाम के दो दोस्त रहते थे। दोनों की मुलाकात कॉलेज में हुई थी। अनन्या हंसमुख और ज़िंदादिल लड़की थी, जबकि विवेक शांत, समझदार और गहरे विचारों वाला लड़का। उनकी दोस्ती धीरे-धीरे गहरी होती गई।

क्लास खत्म होने के बाद अक्सर दोनों साथ बैठकर बातें करते। कभी किताबों पर चर्चा, कभी जीवन पर और कभी सपनों पर। धीरे-धीरे लोगों ने कहना शुरू कर दिया – “तुम दोनों तो हर वक्त साथ रहते हो, कहीं कुछ और तो नहीं?”

लेकिन अनन्या और विवेक दोनों जानते थे कि उनका रिश्ता किसी लेबल का मोहताज नहीं है। यह रिश्ता दोस्ती का था, लेकिन साधारण दोस्ती से कहीं ज्यादा मजबूत।

समय बीता…कॉलेज खत्म हुआ और दोनों अपने-अपने रास्तों पर चल पड़े। अनन्या ने जॉब के लिए दूसरे शहर का रुख किया, और विवेक अपने परिवार के बिज़नेस में लग गया। दूरी बढ़ी, लेकिन उस दूरी में भी एक गजब की पवित्रता…


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एक दूसरे की लत

पत्नी को लड़कर पीहर गए पांच दिन हो गए थे। सतीश को नींद नही आ रही थी। वह करवटें बदल रहा था। रात के एक बजे पत्नी का फोन आया। उसने तुरंत उठा लिया। फोन उठाते ही राधिका बोली " अभी तक जाग रहे हो?

सतीश तुरंत बोला " तुम भी तो जाग रही हो?" काफी देर तक चुप्पी छाई रही। फिर सतीश को लगा जैसे वह रो रही है। वह बोला " क्या हुआ? तुम तो कहकर गई थी ना कि अब कभी लौट कर नही आऊँगी। ना कभी फोन करूँगी। मुझ जैसे खडूस इंसान के साथ अब तुझे रहना ही नही है न? फिर क्यों रो रही हो?"

राधिका ने काफी देर तक जवाब नही दिया। फिर खुद को संयत करते हुए बोली " तुम पुरुष हो न। एक औरत की फिलिंग्स कभी नही समझोगे। जब एक औरत कहती है कि पीहर चली जाऊंगी तब वह चाहती है।…

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