“स्वर्ग या नरक – पत्नी के व्यवहार पर निर्भर”
गाँव के एक छोटे से कस्बे में मोहन नाम का आदमी रहता था। मेहनती, ईमानदार और जिम्मेदार। वह सुबह से शाम तक काम करता और अपनी कमाई से घर का पूरा खर्च उठाता। उसकी पत्नी सुनीता घर सँभालती थी।
शादी के शुरुआती दिनों में सब कुछ ठीक-ठाक था। लेकिन धीरे-धीरे यह साफ़ दिखने लगा कि घर का सुख केवल मोहन की कमाई से तय नहीं होता, बल्कि सुनीता के व्यवहार से भी घर का वातावरण बदल जाता है।
पहला रूप – नरक का घर
सुनीता अक्सर छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा करती।
अगर मोहन थककर देर से घर आता, तो ताने देती –“दूसरों के घरों में तो पति शाम को फूलों का गुलदस्ता लाते हैं, और तुम खाली हाथ आते हो।”
अगर कमाई थोड़ी कम हो जाती, तो कहती –“तुमसे कुछ नहीं होगा, ज़िन्दगी भर गरीबी में ही रहना पड़ेगा।”
घर का खर्च चलाने की जगह वह फिजूलखर्ची करती और ज़रा सी बात पर सास-ससुर से भी झगड़ पड़ती।
धीरे-धीरे घर का माहौल तनावपूर्ण हो गया।मोहन मेहनत से तो पैसा लाता था, लेकिन घर में कदम रखते ही उसका दिल डूब जाता। उसे लगता – “मैं कहाँ आ गया हूँ? यह घर है या युद्धभूमि?”
बच्चे भी उदास रहने लगे।सास-ससुर सोचते – “यह औरत तो घर को नरक बना देगी।”
दूसरा रूप – स्वर्ग का घर
कहानी यहीं खत्म नहीं होती। चलिए उसी मोहन को सोचते हैं, लेकिन अब उसकी पत्नी का स्वभाव अलग है।
यहाँ सुनीता समझदार, मीठा बोलने वाली और सहयोगी है।
जब मोहन थककर घर आता है, तो वह मुस्कुराकर पानी लाती और कहती –“थक गए हो न? बैठो, मैं तुम्हारे लिए चाय बनाती हूँ।”
जब कमाई कम होती, तो कहती –“पैसा चाहे कम हो, लेकिन तुम मेहनत ईमानदारी से करते हो। यही सबसे बड़ा धन है। हम मिलकर सब संभाल लेंगे।”
घर का खर्च वह सलीके से चलाती और बच्चों को भी समझाती –“पिता जी की मेहनत से यह सब मिलता है, कभी व्यर्थ मत करना।”
ऐसे घर में कदम रखते ही मोहन को सुकून मिलता। उसे लगता – “यही तो असली स्वर्ग है। बाहर की सारी थकान, सारी परेशानियाँ यहीं आकर मिट जाती हैं।”
बच्चे खुश रहते, सास-ससुर को भी सम्मान मिलता और घर एक मंदिर जैसा लगता।
मोहन का विचार
मोहन अक्सर अपने दोस्तों से कहता –“दोस्तों, पति की कमाई से घर चलता है, लेकिन पत्नी का व्यवहार ही तय करता है कि घर स्वर्ग बनेगा या नरक। अगर पत्नी मीठे शब्द, धैर्य और समझदारी से घर संभाले, तो छोटी कमाई भी बड़ी लगती है। लेकिन अगर वही कटु वचन बोले और कलह फैलाए, तो लाखों की आय भी बेकार है।”
शिक्षा
पति मेहनत करके घर चलाता है, लेकिन घर का वातावरण पत्नी के व्यवहार से बनता है।
मीठा बोल, धैर्य और समझदारी घर को स्वर्ग बना देते हैं।
कटु वचन, ताने और फिजूलखर्ची घर को नरक बना देते हैं।
👉 यही जीवन की सच्चाई है –पति की जेब घर का ईंधन है, लेकिन पत्नी का स्वभाव घर की दिशा तय करता है।
