बातें — बेहद महत्वपूर्ण होती हैं।
बच्चों के सामने कही गई बातें? सबसे ज़्यादा महत्वपूर्ण। सोच-समझकर बोलनी चाहिए।
माता-पिता बन जाना आसान है, लेकिन एक अच्छे माँ-बाप बनना आसान नहीं।
हमारे बच्चे — चाहे सामने से सुनें या छुपकर ध्यान लगाएं — जैसे भी सुनें, जो भी सुनें, सुनें सिर्फ़ अच्छी बातें, सिखाने वाली बातें।
सच ये है — हम आज जो शब्द बोल रहे हैं, वही शब्द हमारे बच्चों के मस्तिष्क में कल के लिए जमा हो रहे हैं; वही उनके स्वर बन जाएंगे।
दूसरों के बारे में, अपने बारे में, हम सबसे सुंदर बातें करें; ताकि वे सुनें।
जब वे दूसरों की अच्छाई सुनते हैं, तो अपने अंदर की सुंदरता को भी पहचानना आसान हो जाता है।
आइए, अपने बच्चों को सुंदरता से भरी एक दुनिया दें — सुंदरपुर बनाएं।
1 View
