एक सच्चा शिक्षक क्या होता है। What is a true teacher?
एक बूढ़े आदमी की मुलाकात एक नौजवान से होती है।
नौजवान पूछता है, “क्या आप मुझे याद करते हैं?”
बूढ़े आदमी ने कहा, “नहीं।”
फिर उस नौजवान ने कहा, “मैं आपका छात्र था।”
बूढ़े शिक्षक ने पूछा, “तुम अब क्या करते हो जीवन में?”
नौजवान ने जवाब दिया, “मैं भी एक शिक्षक बन गया हूँ।”
शिक्षक ने मुस्कराते हुए कहा, “अच्छा, मेरी तरह?”
नौजवान बोला, “हाँ, दरअसल, मैं इसलिए शिक्षक बना क्योंकि आपने मुझे प्रेरित किया।”
बूढ़े शिक्षक ने उत्सुकता से पूछा, “कब तय किया तुमने कि शिक्षक बनना है?”
नौजवान ने एक कहानी सुनाई:
“एक दिन, मेरा एक दोस्त नया घड़ी पहनकर स्कूल आया।
मुझे वो घड़ी बहुत पसंद आई और मैंने चोरी कर ली।
थोड़ी देर में, दोस्त को पता चला कि उसकी घड़ी गायब है।
उसने तुरंत आपसे शिकायत की।
आपने पूरी कक्षा से कहा, ‘आज किसी छात्र की घड़ी चोरी हुई है। जिसने भी ली है, कृपया वापस कर दें।’
मैंने वापस नहीं की क्योंकि मैं डर गया था।
फिर आपने दरवाज़ा बंद किया और हम सबको खड़ा करके एक घेरा बनाने को कहा।
आपने कहा कि आप सबकी जेबें चेक करेंगे, लेकिन सभी अपनी आँखें बंद रखें।
हमने आँखें बंद कर लीं।
आपने एक-एक करके सबकी जेब टटोलीं।
जब आप मेरी जेब तक पहुँचे, तो आपको घड़ी मिल गई।
लेकिन आपने फिर भी सभी की जेबें चेक कीं और अंत में कहा,
‘हमने घड़ी पा ली है, अब सब अपनी आँखें खोल लें।’
आपने कभी यह नहीं बताया कि घड़ी किसने चुराई थी।
आपने मेरा नाम नहीं लिया, मुझे डाँटा नहीं, कोई भाषण भी नहीं दिया।
उस दिन मुझे बहुत शर्म आई, लेकिन उसी दिन मैंने तय किया कि मैं कभी चोर नहीं बनूँगा,
कभी गलत रास्ते पर नहीं जाऊँगा।
आपने मुझे जो सम्मान दिया, उसी ने मेरी ज़िंदगी बदल दी।
आपने मुझे सिखाया कि एक सच्चा शिक्षक क्या होता है।
क्या आपको वह दिन याद है, सर?”
बूढ़े शिक्षक मुस्कराए और बोले,
“हाँ, मुझे वह घटना याद है – जब किसी की घड़ी चोरी हुई थी और मैंने सबकी जेबें टटोली थीं।
लेकिन मुझे यह याद नहीं कि वो चोर कौन था,
क्योंकि मैं भी अपनी आँखें बंद किए हुए था।”
यही है शिक्षा की सच्ची भावना:
अगर सुधारने के लिए किसी को अपमानित करना पड़े,
तो आप सिखाना नहीं जानते।
