इंसान कोई थाम कर रखने की चीज़ नहीं होता।
जो दिल से साथ नहीं रहना चाहता, उसे हज़ार बार प्यार दो, ध्यान दो या आँखों से समंदर बहा दो—
फिर भी वो एक दिन चला ही जाएगा।
रिश्तों में ज़ोर-ज़बरदस्ती नहीं चलती।
ज़बरदस्ती से दरवाज़े बंद होते हैं, मगर दिल कभी नहीं जुड़ते।
साथ वही रहता है जो सच में रहना चाहता है।
जो दिल से जुड़ा होता है, वो कभी बहाने नहीं बनाता,
और जो जाना चाहता है, उसके पास बहाने ही होते हैं।
दुनिया का सबसे बड़ा दर्द यही है—
किसी को सँभाल कर रखने की कोशिश करना
जो अब खुद ही तुम्हारे साथ नहीं रहना चाहता।
उसे रोकना वैसा ही है जैसे किसी बच्चे को जबरदस्ती गणित का कठिन सूत्र याद करवाना—
सिर भारी होगा, थकान होगी, लेकिन अंत में कुछ भी असर नहीं होगा।
क्योंकि अगर रिश्ता दिल से न हो, तो उसके मायने भी खो जाते हैं।
इसलिए जो जाना चाहता है, उसे जाने दो।
प्यार का मतलब बाँधना नहीं,
प्यार का असली मतलब है आज़ादी देना—
ताकि वो खुद महसूस कर सके कि किसका साथ उसके लिए सच में कीमती था।
जो तुम्हारा है, वो बिना आवाज़ दिए लौट आएगा,
और जो सिर्फ राहगीर था, वो किसी मोड़ पर खो जाएगा।
अपना प्यार सच्चा रखो,
पर खुद को किसी के पीछे इतना मत खो दो
कि तुम्हारी अपनी अहमियत ही खत्म हो जाए।
