जीना दूसरों के लिए आसान हो सकता है, पर सच्चा जीवन वही है जो तुम अपने लिए जियो।
कभी-कभी जीवन में सबसे मुश्किल काम होता है खुद के साथ जीना। लोग समझते हैं कि अपने लिए जीना स्वार्थ है, लेकिन सच्चाई ये है कि जो खुद के लिए नहीं जीता, वो किसी और के भी किसी काम का नहीं रह जाता। हममें से ज़्यादातर लोग अपने जीवन का बड़ा हिस्सा दूसरों को खुश करने में गुज़ार देते हैं। कभी परिवार के लिए, कभी समाज के लिए,कभी उस व्यक्ति के लिए जिसे हमने अपनी ज़िंदगी का सबसे अहम हिस्सा बना लिया था। धीरे-धीरे, हम अपनी इच्छाओं को किनारे रख देते हैं, अपनी बातों को दबा देते हैं, और अपनी पहचान तक को उस “स्वीकृति” की बलि चढ़ा देते हैं जो शायद कभी मिलती ही नहीं।
एक दिन ऐसा आता है जब भीतर से खालीपन घर करने लगता है। वही खालीपन जो किसी को समझ में नहीं आता, पर हर पल चुभता रहता है। तब महसूस होता है कि शायद हमने बहुत कुछ दिया, लेकिन खुद को कभी कुछ नहीं दिया। हर किसी को खुश करने की चाह में खुद की मुस्कान कहीं खो गई। और सच्चाई तो ये है कि चाहे जितना भी दे दो, दुनिया को हमेशा कुछ न कुछ शिकायत रहती ही है। तुम मर भी जाओ, तो भी कुछ लोग कोसते ही रहेंगे कि तुमने ऐसा क्यों किया, वैसा क्यों नहीं किया।
जीवन का अर्थ दूसरों की अपेक्षाओं में ढूँढना सबसे बड़ी भूल है। क्योंकि जो आज तुम्हें समझता नहीं, वही कल तुम्हारे जाने के बाद तुम्हारी अच्छाइयों का गुणगान करेगा पर तब तुम सुन नहीं पाओगे। इसलिए जब तक साँस है, तब तक खुद को सुनो। अपने मन की बातों को समझो, अपने भीतर के उस छोटे बच्चे से मिलो जो कभी हँसना जानता था, जो बिना डर के सपने देखता था।
खुद के साथ जीना मतलब यह नहीं कि दूसरों से मुँह मोड़ लो। इसका मतलब बस इतना है कि अपनी शांति, अपनी मानसिक स्थिति और अपनी आत्मा को दूसरों के मूड या राय पर निर्भर मत रहने दो। हर किसी को खुश करने की कोशिश, एक धीमा ज़हर है जो धीरे-धीरे तुम्हारे अस्तित्व को ख़त्म कर देता है।
कभी-कभी दूर हटना ज़रूरी होता है, ताकि खुद को फिर से पा सको। ताकि तुम्हारा मन तुम्हें याद करे, ताकि तुम अपने साथ बिना किसी दिखावे, बिना किसी भूमिका के कुछ वक्त गुज़ार सको। क्योंकि जब तुम खुद के साथ सहज हो जाओगे, तब ही तुम दुनिया के साथ सच में ईमानदार रह पाओगे।
और आखिर में एक बात याद रखना, जो लोग आज तुम्हें कोसते हैं, वही कल तुम्हें याद करके अपने भीतर झाँकेंगे। इसलिए उनकी राय से ज़्यादा कीमत अपनी आत्मा की शांति को दो। दूसरों को खुश करना बंद कर दो, क्योंकि तुम किसी के “संपूर्ण होने” की कहानी नहीं हो, तुम अपनी अधूरी कहानी के लेखक हो।
जीना दूसरों के लिए आसान हो सकता है, पर सच्चा जीवन वही है जो तुम अपने लिए जियो। क्योंकि अंत में जब सब चला जाता है, तब सिर्फ़ तुम और तुम्हारा मन ही बचे रहते हैं और अगर उस वक्त तुम अपने भीतर शांति महसूस कर सको, तो समझो तुमने जीवन जी लिया। 🖤
