अंतरंगता Intimacy
शरीर को छूना नहीं है केवल,
जब लहरों-सी वासना उठे मन में।
अंतरंगता तो वो अहसास है,
जब बिना छुए, उसकी रूह से जुड़ जाए मन।
जब मीलों की दूरियाँ हों,
बीच में पर्वत, जंगल और समंदर हों,
फिर भी उसकी हर धड़कन तुम तक पहुँचे,
उसकी ख़ामोशी भी तुमसे बातें करे —
वहीं है सच्चा प्रेम, वहीं है गहरी अंतरंगता।
जब उसकी आँखों का सपना,
तुम्हारे दिल की धड़कन बन जाए,
और उसका दर्द, तुम्हारी आत्मा को चीर जाए —
तब जानो, तुमने उसे सिर्फ़ चाहा नहीं,
उसे जिया है… आत्मा के हर कोने में।
1 View
