बदलाव की शुरुआत स्वयं से
अक्सर हम जीवनभर दूसरों को बदलने में लगे रहते हैं—पति पत्नी को, माता-पिता बच्चों को, और बच्चे बड़ों को। लेकिन असली परिवर्तन तब आता है जब इंसान खुद को बदलने की कोशिश करता है। जलालुद्दीन रूमी ने भी यही जाना कि अगर बदलाव लाना है, तो शुरुआत अपने आप से करनी होगी। खुद को बदलना ही सबसे कठिन, पर सबसे असरदार काम है। जब हम भीतर से बदलते हैं, तो हमारे आस-पास की दुनिया अपने आप बदलने लगती है। जीवन की शांति और सफलता उसी के पास है जो दूसरों को नहीं, खुद को सुधारने का साहस रखता है।
*भीतर बदलो, बाहर सुधरे*
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