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शिकायतों का पुलिंदा बांध रखा था मैंने आपके लिए

काफी देर बेल बजने के बाद अंजलि ने बड़े बेमन से जाकर दरवाजा खोला। शेखर घर में इंटर होते ही सोफे पर जाकर बैठ गए। सुबह की घटना चलचित्र की बात दिमाग में चलने लगी। शेखर की गलती सिर्फ इतनी थी, कि अंजलि की सहेली शिखा को अपने घर आने के लिए मना कर दिया था। क्योंकि उसे लगता था कि वह अपने ससुराल की फिजुल की पंचायती आकर के शेयर करती हैं, जिससे अंजली सुनकर व्यथित होती है और उसके ऊपर बुरा असर पड़ रहा है। इसी बात को लेकर दोनों में कहासुनी हो गई थी। बात इतनी बढ़ गई थी, कि अंजलि ने मायके जाने का निर्णय ले लिया।

शेखर कुछ नहीं बोला और ऑफिस निकल गया था। घर पर अंजली अपनी तैयारी पूरी कर चुके थी। शेखर ने बहुत मनाने की कोशिश की पर अंजली नहीं मानी और जाने लगी। शेखर ने बोला, अगर तुम्हें जाना है तो जाओ, कोई बात नहीं। लेकिन कहीं भी जाते समय बड़ों का आशीर्वाद लेते हैं। तुम जाओ और माता पिता का आशीर्वाद ले लो, मैं तब तक गाड़ी निकालता हूं। अंजली अपने सास ससुर का आशीर्वाद लेने चली गई और शेखर कमरे में गया। उसने अंजलि के बैग में जाने क्या क्या रखा और बाहर निकल कर गाड़ी निकालने लगा।

अंजली जाकर चुपचाप गाड़ी पर बैठ गई। स्टेशन तक आपस में बात नहीं हुई। शेखर स्टेशन पर छोड़ कर के वापस चला आया क्योंकि अंजलि ने गुस्से में उसे जाने के लिए बोल दिया। अंजली की गाड़ी जाने में अभी एक डेढ़ घंटे की देरी थी। अब शाम के 6:00 बज चुके थे। ठंडी हवाएं चलनी शुरू हो गई थी। अब उसे ध्यान आया उसने कोई गरम कपड़ा लिया ही नहीं था। फिर कुछ सोचते हुए उसने बैग खोला। उसमें 1 शॉल ,1 स्वेटर, कुछ पैसे और एक पर्ची पर कुछ लिखा हुआ मिला ।

पर्ची पढ़ते-पढ़ते अंजली का गला भर आया। चेहरा आंसुओं से सराबोर हो गया । सोचने लगी कि शेखर उसका कितना ख्याल रखता है। उसे इस तरह से नहीं लड़ना चाहिए था। जब वह मम्मी पापा के पैर छूने उनके कमरे में गई थी, तभी शेखर ने यह सब सामान उसके बैग में रख दिया था । पर्ची पर लिखा था ठंड का मौसम है और रात भर का सफर है । तुम्हें सर्दी ना लगे ,इसलिए मैं कपड़े रख दे रहा हूं और कुछ पैसे रखे हैं, जो तुम्हारे मायके में तुम्हारे काम आएंगे। जब तुम्हें ऐसा लगे इतनी छोटी सी बात पर हमें नहीं झगड़ना चाहिए था, तब वापस चली आना, मैं तुम्हारा सदैव इंतजार करूंगा। तुम्हारा शेखर,

शेखर बड़े अनमने ढंग से घर में कदम रखा और सोफे पर जाकर बैठ गया। रात के 8:30 बज चुके थे। एकाएक डोर बेल बजी और दरवाजा खोलने पर शेखर ने अपने सामने अंजलि को पाया ।अंजली घर में घुसते हुए बोली, आप ऐसे क्यों बैठे हैं? डिनर नहीं करना है? क्या हाथ धो लीजिए, मैंने डिनर लगाती हूं। शेखर जैसे विश्व का आठवां अजूबा देख रहा था।

कुछ घंटे पहले उसे तरह-तरह की जली कटी सुन कर मायके जाने वाली अंजली, अभी उसके सामने खड़ी होकर प्यार से उसे डिनर करने के लिए बोल रही थी। क्योंकि यही होता है पति-पत्नी का पवित्र रिश्ता, जिसमें लड़ाई झगड़ा , मनमुटाव हो तो होते हैं। लेकिन प्यार मोहब्बत अपनापन और अपनों के लिए चिंता , उससे कहीं ज्यादा होती है।

शेखर ने अंजली का हाथ पकड़ कर गले से लगा लिया अंजलि ने सिर्फ इतना ही कहा ,

💕💕💕 शिकायतों का पुलिंदा बांध रखा था मैंने आपके लिए,

♥️♥️♥️♥️♥️ आपने गले से लगा कर

💝💝💝💝 सारी शिकायतों को एक बार में खत्म कर दिया। 💞💞💞💞

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