नारी के प्रेम को समझना इतना आसान नहीं है।
नारी के प्रेम को समझना इतना आसान नहीं है। एक पुरुष की तरह कोई नारी इतनी आसानी से किसी के प्रेम में नहीं पड़ती।उनके प्रेम को पाने में समय लगता है।
लेकिन एक बार जब वह किसी पुरुष को अपना सब कुछ समर्पित कर देती है तो उसके लिए वह नारी सब कुछ कर सकती है। इसीलिए उनका प्रेम इतनी जल्दी उस व्यक्ति से उठ भी नहीं जाता। वह धैर्य रखती है, प्रतीक्षा करती है।बस अंतर यही है कि उस प्रतीक्षा को पुरुष न तो समझ पाता है, न ही समझना चाहता है।
नारी की संभालने की आदत को वह बंधन समझने की भूल कर बैठता है, उनके स्नेह को स्नेह से लौटाना भूल जाता है।
नहीं, नारी का प्रेम इतना सहज नहीं है। पर यदि एक बार उनके हृदय से प्रेम उठ जाए, तो वह फिर कभी पलटकर नहीं देखती। चाहे उसे कितना भी कष्ट क्यों न हो,जिस पुरुष को उसने कभी अपना सब कुछ देकर चाहा था,एक बार यदि उससे मुँह मोड़ ले,तो वह फिर कभी लौटकर नहीं आती। इसलिए नारी के प्रेम को समझना सीखिए क्योंकि नारी इतनी आसानी से प्रेम नहीं करती।