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कोई दिखावा नहीं सिर्फ आत्मा की गहराइयों से बहता हुआ अपनापन

मेरे लिए जीवन का सबसे सुंदर क्षण वही है, जब मुझे यह एहसास होता है कि कोई मुझे सच्चे मन से प्रेम करता है। ऐसा प्रेम, जिसमें कोई शर्त नहीं, कोई दिखावा नहीं सिर्फ आत्मा की गहराइयों से बहता हुआ अपनापन।

जब मैं उसकी आँखों में देखती हूँ, तो लगता है जैसे मेरी सारी थकान मिट जाती है। उसकी चुप्पी में भी एक सुकून होता है, और जब वह अनमना हो जाता है, तो मुझे एक हल्की-सी उदासी छू जाती है। उसका सहनशील स्वभाव मुझे किसी खिलते हुए फूल की तरह लगता है धीरे-धीरे बढ़ता हुआ, धैर्य और ममता से भरा हुआ।

तेज़ रफ्तार वाली इस दुनिया में भी मैं उसके साथ छोटे-छोटे क्षणों में सुख खोज लेती हूँ। चाहे वह आँखों में काजल लगाने की मेरी आदत हो, या अचानक गुनगुनाई हुई धुनें, बिखरी हुई थाली में सजा स्नेह हो, या इंतज़ार करने की मेरी क्षमता—हर चीज़ में मुझे लगता है मानो मैं उसके लिए ही जी रही हूँ।

प्रेम मुझे और अधिक ज़मीन से जोड़ देता है। मैं और भी सरल हो जाती हूँ, और कभी-कभी अपनी गलतियों और उलझनों में खुद को खो बैठती हूँ। पर भीतर से हमेशा चाहती हूँ कि वह मुझे तलाशे, मुझे संभाले, मेरे मन की थकान उतारे, मेरे बालों को धीरे से हटाए और मुझे यह एहसास दिलाए कि मैं उसके लिए कितनी महत्वपूर्ण हूँ।

और हाँ, किसी कठिन और उदास दिन के अंत में, जब वह मुझे बाँहों में भरकर कहे “तुम चाहे जितनी जिद्दी हो, जितनी परेशान करने वाली हो, पर तुम्हारे अलावा मुझे किसी और की चाहत नहीं। मुझे बस तुम ही चाहिए।”उस एक वाक्य में मुझे पूरा संसार मिल जाता है।

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