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22 साल की उम्र में जब शरीर का यौवन उफान मारता है

तो इस उम्र में सभी लड़कियों का मन होता है शादी करने का अपने पति के साथ आलिंगन होने का क्यों की शरीर के हार्मोन हमे संकेत देते हैं की हमारा शरीर अब शारीरिक संभोग के लिए तैयार है

मेरे साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ, जैसा अक्सर कई लड़कियों के साथ होता है। हर नए लड़के में मैं अपना हमसफ़र तलाशती, और कभी-कभी दिन में ही सुहागरात के सपने देखने लगती। लेकिन इसका ये मतलब कतई नहीं था कि मेरा चरित्र खराब था। हर लड़की एक उम्र के पड़ाव पर अपने शरीर और भावनाओं में बदलाव महसूस करती है — यह एक स्वाभाविक प्रक्रिया है।

मैं करियर को लेकर बेहद जुनूनी थी। ऑफिस का काम और आगे बढ़ने की लगन इतनी थी कि शादी की बात हर बार टलती चली गई। सोच यही थी कि पहले खुद को स्थापित कर लूं, फिर घर-परिवार के बारे में सोचूंगी।

जब मेरी उम्र 23 साल थी, तो मेरी दादी शादी का दबाव डालने लगीं। कहती थीं, “कम से कम मरने से पहले तेरे पति को देख लूं।” लेकिन मैं अपने सपनों में खोई हुई थी — और शादी फिलहाल मेरी प्राथमिकता नहीं थी। कब 23 से 28 हो गई, पता ही नहीं चला। अब मां भी कहने लगीं, “बुढ़ापे में घर बसाओगी क्या?” मैं चिढ़ जाती — “28 कोई उम्र है शादी की?”

दरअसल, सोशल मीडिया और बॉलीवुड का प्रभाव इतना था कि मुझे लगने लगा, शादी का फैसला सिर्फ तब लेना चाहिए जब मन पूरी तरह तैयार हो। बड़ी-बड़ी अभिनेत्रियाँ कहती थीं कि "शादी से पहले खुद को जानो, खुद को समय दो", और मैंने भी मान लिया कि यही रास्ता सही है।

लेकिन 31 की उम्र में जब पीरियड्स के दौरान असामान्य दर्द और ज्यादा ब्लीडिंग होने लगी, तो डॉक्टर ने साफ कहा — "अगर फैमिली की प्लानिंग है, तो अब देर मत कीजिए। शरीर की अपनी सीमाएं होती हैं।"

घर आकर इंटरनेट खंगाला तो देखा कि फिल्मी सितारे अंडाणु (एग) फ्रीज करवा लेते हैं — ताकि जब चाहें तब मां बन सकें। यह सुनकर राहत तो मिली, लेकिन जब हकीकत जाना तो समझ आया कि यह सुविधा हर किसी के लिए नहीं होती। मुंबई के एक बड़े अस्पताल में डॉक्टर ने बताया कि अंडाणुओं की सबसे अच्छी गुणवत्ता 25 से 27 की उम्र के बीच होती है — मेरी उम्र 31 पार कर चुकी थी।

उपर से एग फ्रीजिंग का खर्च — हर महीने करीब 30,000 रुपये। अब समझ आया कि समय की अनदेखी ने कितना बड़ा मोड़ बदल दिया है।

आखिरकार, 33 की उम्र में मेरी शादी एक 36 साल के व्यक्ति से हुई। पति बहुत अच्छे हैं, साथ भी मजबूत है, लेकिन चार साल बीतने के बाद भी हम माता-पिता नहीं बन पाए हैं। अब दादी की वो बात बार-बार याद आती है — “शादी कर लो, वरना बहुत देर हो जाएगी।”

जिस करियर को बनाने में इतने साल लगाए, अब वही कमाई इलाज और टेस्ट पर खर्च हो रही है।

आज मैं हर उस युवा से कहना चाहती हूँ — कि करियर ज़रूरी है, लेकिन जीवन के हर पड़ाव का एक समय होता है। जैसे पहली माहवारी एक निश्चित उम्र में आती है, वैसे ही मातृत्व के लिए भी एक सही उम्र होती है।

हीरोइनों और सेलेब्रिटीज़ को देखकर अपने फैसले न लें। वे अपनी चमक और विकल्प पैसे के दम पर खरीद सकती हैं — हम नहीं।

इसलिए सोच-समझकर, शरीर और समय का सम्मान करते हुए निर्णय लें। ताकि आगे चलकर पछताना न पड़े — और जीवन का हर पल सच्चे अर्थों में जिया जा सके।

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