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For Girls

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रूठी हुई रागिनी

जो लड़कियाँ ग़ुस्से में जलती हैं,

वो दरअसल बहुत जल्दी बुझ जाती हैं।

उनके राग जैसे आग होते हैं,

और उनके आँसू—बिना सीले बरसात।

अपनों से जो चोटें मिलती हैं,

वो चुपचाप दिल के भीतर रिसती हैं।

न कहती हैं कुछ, न जताती हैं दर्द,

बस आँखों से बहते हैं बिन आवाज़ आँसू।

भीतर ही भीतर चटकती हैं,

जैसे पतझड़ में कोई हरी डाल।

कोई देख नहीं पाता वो टूटन,

कोई सुन नहीं पाता वो सिसकी।

फिर धीरे-धीरे वो ख़ामोश हो जाती हैं,

हँसी की जगह आ जाती है एक सन्नाटा।

और लोग कहते हैं—

"तू तो पहले बहुत जिंदादिल थी, अब क्या हुआ?"

कौन बताए,

वो जिंदादिल रूह तो कब की दम तोड़ चुकी है।

अब तो बस एक देह है,

जो जी रही है, पर ज़िंदा नहीं है।


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