दाल में नमक थोड़ा ज्यादा था…
“दाल में नमक ज्यादा है!” रात के खाने की पहली ही बाइट लेते हुए राकेश ने बोल दिया।😋
नीतू ने कुछ नहीं कहा। बस चुपचाप उठी, किचन में गई और सबके लिए दही निकाल लाई। राकेश, उनके 7 साल के बेटे आरव और सास-ससुर को प्लेट में परोसा।
राकेश थोड़े गुस्से में था, शायद ऑफिस की टेंशन थी… और हां, दाल में नमक वाकई थोड़ा ज्यादा था।
रात को जब सब सो गए, तब नीतू चुपचाप बालकनी में बैठी थी।
थोड़ी थकी, थोड़ी उदास, पर बहुत कुछ कहे बिना।
राकेश भी समझ गया था कि शायद बात को थोड़ा ज़्यादा खींच दिया उसने।
वो बाहर आया, पानी का गिलास थमाया और बगल में बैठ गया।
“सॉरी नीतू… पता नहीं क्यों छोटी-छोटी बातों पर चिड़चिड़ा हो जाता हूँ।”
नीतू ने मुस्कुराकर कहा – “झगड़े तो होते ही हैं… लेकिन जब एक चाय का कप भी बिना मीठा अधूरा लगे, तो रिश्ता कैसे बिना प्यार के चलेगा?”
राकेश ने उसका हाथ पकड़ लिया। “तेरे हाथ की नमकीन दाल भी, अब मीठी लग रही है…”
नीतू हंस पड़ी। उसकी आँखें थोड़ी नम थीं… पर दिल पूरी तरह से भरा हुआ।
कभी-कभी रिश्तों में प्यार साबित करने के लिए महंगे तोहफों या दिखावों की ज़रूरत नहीं होती।
कभी एक “सॉरी”, कभी एक “चाय”, कभी एक “मैं समझता हूँ”,
और सबसे ज़्यादा — झगड़ों में भी एक-दूसरे का साथ देना ही रिश्ता बचाए रखता है।
क्योंकि शादी का रिश्ता तभी चलता है जब पति-पत्नी झगड़ों में भी भरोसा और प्यार बनाए रखते हैं। 💑🙏