मिलजुलकर जो साथ चलें, उनके घर लक्ष्मी बसे ।
पुराने समय में एक बात अच्छी थी कि पति गुस्से में होता था, तो पत्निया चुप रहती थी। लेकिन आज उस चुप रहने को बच्चे कायरता कहते हैं, दबना कहते हैं। मुझे ऐसा नहीं लगता। बल्कि सच्चाई ये है कि जब हम दो लोग मिलकर गृहस्थी बसाते हैं, तो दोनों में से एक का शांत होना बहुत ज़रूरी होता है। और यहाँ पर भी स्त्रियाँ इस काम में ज़्यादा माहिर होती हैं। स्थिति को संभालना उनको बेहतर आता है। इसलिए वो चुप हो जाती थी। कहा भी गया है कि एक चुप सौ सुख।लेकिन आजकल आधुनिकता के चलते दोनों बराबर लड़ने लगे हैं, जिनके नतीजे हम आए दिन देखने लगे हैं।परिवार का अर्थ ही मिलकर रहना होता है।एक उदास हो तो दूसरा पूछ ले। एक गुस्से में हो तो दूसरा शांत हो जाए। एक बीमार हो तो दूसरा देखभाल का ले। एक कमाए, दूसरा घर चला ले। बस यूँ ही मिलजुलकर जो साथ चलें, उनके घर लक्ष्मी बसे ।
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