top of page

Love Shayari

Public·1 member

मेरे हाथों में लिखी है तक़दीर मेरी..

मेरे हाथों में लिखी है तक़दीर मेरी..

मगर उस पर मेरा कोई हक़ नहीं..

हर लकीर में नाम है किसी और का..

ये खेल भी कम अजीब नहीं..

सोचती हूँ बदल दूँ मैं अपनी किस्मत..

पर रब की मरज़ी के आगे मेरी चलती नहीं..

ज़िंदगी तो है मेरी मगर मेरे बस में बिल्कुल नहीं..🔱🖤

1 View
bottom of page