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Public·64 members

सूरज ने कभी नहीं किया वादा सुबह से मिलने का,जबकि वो हर रोज मिला नदियों ने कभी नहीं कहा सागर से, जबकि वे उससे मिलीं पेड़ों ने कभी नहीं किया वादा हमसे जबकि उन्होंने फल दिया जहाँ आश्वस्ती होती है वहाँ वादा नहीं होता वादा स्वयं से किया गया छलावा है।

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